Tuesday, 7 May 2013

08.05.13


एक किसान था. वह एक बड़े से खेत में खेती किया करता था. उस खेत के बीचो-बीच पत्थर का एक हिस्सा ज़मीन से ऊपर निकला हुआ था जिससे ठोकर खाकर वह कई बार गिर चुका था और ना जाने कितनी ही बार उससे टकराकर खेती के औजार भी टूट चुके थे.
रोजाना की तरह आज भी वह सुबह-सुबह खेती करने पहुंचा पर जो सालों से होता आ रहा था एक वही हुआ , एक बार फिर किसान का हल पत्थर से टकराकर टूट गया.
किसान बिल्कुल क्रोधित हो उठा , और उसने मन ही मन सोचा की आज जो भी हो जाए वह इस चट्टान को ज़मीन से निकाल कर इस खेत के बाहर फ़ेंक देगा.
वह तुरंत भागा और गाँव से ४-५ लोगों को बुला लाया और सभी को लेकर वह उस पत्त्थर के पास पहुंचा .
” मित्रों “, किसान बोला , ” ये देखो ज़मीन से निकले चट्टान के इस हिस्से ने मेरा बहुत नुक्सान किया है, और आज हम सभी को मिलकर इसे जड़ से निकालना है और खेत के बाहर फ़ेंक देना है.”
और ऐसा कहते ही वह फावड़े से पत्थर के किनार वार करने लगा, पर ये क्या ! अभी उसने एक-दो बार ही मारा था की पूरा-का पूरा पत्थर ज़मीन से बाहर निकल आया. साथ खड़े लोग भी अचरज में पड़ गए और उन्ही में से एक ने हँसते हुए पूछा ,” क्यों भाई , तुम तो कहते थे कि तुम्हारे खेत के बीच में एक बड़ी सी चट्टान दबी हुई है , पर ये तो एक मामूली सा पत्थर निकला ??”
किसान भी आश्चर्य में पड़ गया सालों से जिसे वह एक भारी-भरकम चट्टान समझ रहा था दरअसल वह बस एक छोटा सा पत्थर था !! उसे पछतावा हुआ कि काश उसने पहले ही इसे निकालने का प्रयास किया होता तो ना उसे इतना नुक्सान उठाना पड़ता और ना ही दोस्तों के सामने उसका मज़ाक बनता Friends, इस किसान की तरह ही हम भी कई बार ज़िन्दगी में आने वाली छोटी-छोटी बाधाओं को बहुत बड़ा समझ लेते हैं और उनसे निपटने की बजाये तकलीफ उठाते रहते हैं. ज़रुरत इस बात की है कि हम बिना समय गंवाएं उन मुसीबतों से लडें , और जब हम ऐसा करेंगे तो कुछ ही समय में चट्टान सी दिखने वाली समस्या एक छोटे से पत्थर के समान दिखने लगेगी जिसे हम आसानी से ठोकर मार कर आगे बढ़ सकते हैं.

Monday, 6 May 2013

07.05.13


~~~~~~सच्चा प्रेम~~~~~~
एक गरीब आदमी अपनी पत्नी के साथ रहता था।
एक दिन पत्नी ने अपने लिए एक कंघे की फरमाइश की ताकि वह अपने लम्बे बालों की देखभाल ठीक से कर सके। पति ने बहुत दुखी मन से मना करते हुई बताया कि पैसे न होने के कारण वह अपनी घड़ी का टूटा हुआ पट्टा भी नहीं सुधरवा पा रहाहै। पत्नी नेअपनी बात पर जोर नहीं दिया।
पति काम पर जाते समय एक घड़ी-दुकान के सामने से गुजरा, उसने अपनी टूटी घड़ी कम दाम पर बेचकर एक कंघा खरीद लिया।
शाम घर आते समय वह खुश था कि अपनी पत्नी को नया कंघा दे सकेगा किन्तु अपनी पत्नी के छोटे-छोटे बाल देखकर चकित रह गया। उसकी पत्नीअपने बाल बेचकर घड़ी का नया पट्टा हाथ में लेकरखड़ी थी।
यह देखकर दोनों की आँखों से एक साथ आँसू बहने लगे। यह अश्रुपात अपना प्रयास के विफल होने के कारण न होकर एक दूसरे के प्रति पारस्परिक प्रेम केआधिक्यके कारण था।
वास्तव में प्यार करना कुछनहीं है, प्यार पाना कुछ उपलब्धि है किन्तु प्यार करने के साथ-साथ प्रेमपत्रका प्यार पाना ही सच्ची उपलब्धि है। प्यार को अपनेआप मिली वस्तु न मानें, प्यार पाने के लिए प्यार दें।

Sunday, 5 May 2013

06.05.13


एक किसान को गाँव
के साहूकार से कुछ धन उधार लेना पड़ा।
बूढा साहूकार बहुत चालाक
और धूर्त था, उसकी नज़र किसान
की खूबसूरत बेटी पर थी।
अतः उसने किसान से एक सौदा करने
का प्रस्ताव रखा। उसने
कहा कि अगर
किसान अपनी बेटी की शादी साहूकार
से कर दे
तो वो उसका सारा कर्ज माफ़
कर देगा। किसान और उसकी बेटी,
साहूकार के इस प्रस्ताव से कंपकंपा उठे।
तब साहूकार ने उनसे कहा कि ठीक
है,अब ईश्वर को ही यह
मामला तय करने देते हैं। उसने
कहा कि वो दो पत्थर
उठाएगा,एक काला और एक सफ़ेद, और
उन्हें एक खाली थैले में
डाल देगा। फिर किसान
की बेटी को उसमें से एक पत्थर
उठाना होगा-
१-अगर
वो काला पत्थर उठाती है
तो वो मेरी पत्नी बन
जायेगी और किसान का सारा कर्ज
माफ़ हो जाएगा ,
२-अगर वो सफ़ेद पत्थर उठाती है
तो उसे साहूकार से शादी करने
की जरूरत नहीं रहेगी और फिर
भी किसान का कर्ज माफ़ कर
दिया जाएगा,
३-पर अगर वो पत्थर उठाने से
मना करती है तो किसान को जेल में
डाल दिया जाएगा।
वो लोग किसान के खेत में एक
पत्थरों से भरी पगडण्डी पर
खड़े थे, जैसे ही वो बात कर रहे थे,
साहूकार ने नीचे झुक कर
दो पत्थर उठा लिये, जैसे ही उसने
पत्थर उठाये, चतुर बेटी ने
देख लिया कि उसने दोनों ही काले
पत्थर उठाये हैं और उन्हें
थैले में डाल दिया। फिर साहूकार ने
किसान की बेटी को थैले में से एक
पत्थर
उठाने के लिये कहा। अब किसान
की बेटी के लिये
बड़ी मुश्किल हो गयी, अगर
वो मना करती है तो उसके
पिता को जेल में डाल दिया जाएगा,
और अगर पत्थर उठाती है
तो उसे साहूकार से
शादी करनी पड़ेगी।
किसान की बेटी बहुत समझदार थी,
उसने थैले में हाथ डाला और एक पत्थर
निकाला, उसे देखे बिना ही घबराहट
में पत्थरों से
भरी पगडण्डी पर नीचे गिरा दिया,
जहां वो गिरते ही अन्य
पत्थरों के बीच गुम हो गया।
"हाय, मैं भी कैसी अनाड़ी हूँ", उसने
कहा, " किन्तु कोई बात
नहीं, अगर आप थैले में दूसरा पत्थर देखेंगे
तो पता चल
जाएगा कि मैंने कौनसा पत्थर
उठाया था।" क्योंकि थैले में
अभी दूसरा पत्थर है, किसान की बेटी
जानती थी कि थैली से केवल काला
पत्थर निकलेगा और यही
माना जायेगा कि उसने सफ़ेद
पत्थर उठाया था और
साहूकार भी अपनी बेईमानी को स्वीकार
नहीं कर पाता इस तरह होशियार किसान
की बेटी ने असंभव को संभव
कर दिखाया।

"बड़ी से बड़ी समस्या का भी हल होता है, बस
हम उसे हल करने का कदम नहीं उठाते"

Saturday, 4 May 2013

05.05.13


एक फकीर 50 साल से एक ही जगह बैठकर रोज की 5 नमाज पढता था.
एक दिन आकाशवाणी हुई और खुदा की आवाज आई
"हे फकीर.!
तु 50 साल से नमाज पढ रहा है, लेकिन तेरी एक भी नमाज कबुल नही हुई"
फकीर के साथ बैठने वाले दुसरे बंदो को भी दु:ख हुआ कि,
यह बाबा 50 साल से नमाज पढ रहे है और इनकी एक भी नमाज कबुल नही हुई.
...
खुदा यह तेरा कैसा न्याय.?
लेकिन फकीर दु:खी होने के बजाय खुशी से नाचने लगा.
दुसरे लोगो ने फकीर को देखकर आश्चर्य हुआ.
एक बंदा फकीर से बोला : बाबा, आपको तो दु:ख होना चाहिए कि आपकी 50 साल कि बंदगी बेकार गई.!
फकीर ने जवाब दिया : " मेरी 50 साल की बंदगी भले ही कबुल ना हुई तो क्या हुआ...!!! लेकिन खुदा को तो पता है ना कि मैँ 50 साल से बंदगी कर रहा हूँ "
इसिलिए दोस्तो जब आप मेहनत करते हो और फल ना मिले तो निराश मत होना,
क्युकिँ
अल्लाह को तो पता है ही कि आप मेहनत कर रहे है, इसिलिए फल तो जरुर देगें..!!

Friday, 3 May 2013

04.05.13


बहुत पुरानी बात है. मिस्र देश में एक सूफी संत रहते थे जिनका नाम ज़ुन्नुन था. एक नौजवान ने उनके पास आकर पूछा, “मुझे समझ में नहीं आता कि आप जैसे लोग सिर्फ एक चोगा ही क्यों पहने रहते हैं!? बदलते वक़्त के साथ यह ज़रूरी है कि लोग ऐसे लिबास पहनें जिनसे उनकी शख्सियत सबसे अलहदा दिखे और देखनेवाले वाहवाही करें”.
ज़ुन्नुन मुस्कुराये और अपनी उंगली से एक अंगूठी निकालकर बोले, “बेटे, मैं तुम्हारे सवाल का जवाब ज़रूर दूंगा लेकिन पहले तुम मेरा एक काम करो. इस अंगूठी को सामने बाज़ार में एक अशर्फी में बेचकर दिखाओ”.
नौजवान ने ज़ुन्नुन की सीधी-सादी सी दिखनेवाली अंगूठी को देखकर मन ही मन कहा, “इस अंगूठी के लिए सोने की एक अशर्फी!? इसे तो कोई चांदी के एक दीनार में भी नहीं खरीदेगा!”
“कोशिश करके देखो, शायद तुम्हें वाकई कोई खरीददार मिल जाए”, ज़ुन्नुन ने कहा.
नौजवान तुरत ही बाज़ार को रवाना हो गया. उसने वह अंगूठी बहुत से सौदागरों, परचूनियों, साहूकारों, यहाँ तक कि हज्जाम और कसाई को भी दिखाई पर उनमें से कोई भी उस अंगूठी के लिए एक अशर्फी देने को तैयार नहीं हुआ. हारकर उसने ज़ुन्नुन को जा कहा, “कोई भी इसके लिए चांदी के एक दीनार से ज्यादा रकम देने के लिए तैयार नहीं है”.
ज़ुन्नुन ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तुम इस सड़क के पीछे सुनार की दुकान पर जाकर उसे यह अंगूठी दिखाओ. लेकिन तुम उसे अपना मोल मत बताया, बस यही देखना कि वह इसकी क्या कीमत लगाता है”.
नौजवान बताई गयी दुकान तक गया और वहां से लौटते वक़्त उसके चेहरे पर कुछ और ही बयाँ हो रहा था. उसने ज़ुन्नुन से कहा, “आप सही थे. बाज़ार में किसी को भी इस अंगूठी की सही कीमत का अंदाजा नहीं है. सुनार ने इस अंगूठी के लिए सोने की एक हज़ार अशर्फियों की पेशकश की है. यह तो आपकी माँगी कीमत से भी हज़ार गुना है!”
ज़ुन्नुन ने मुस्कुराते हुए कहा, “और वही तुम्हारे सवाल का जवाब है. किसी भी इन्सान की कीमत उसके लिबास से नहीं आंको, नहीं तो तुम बाज़ार के उन सौदागरों की मानिंद बेशकीमती नगीनों से हाथ धो बैठोगे. अगर तुम उस सुनार की आँखों से चीज़ों को परखने लगोगे तो तुम्हें मिट्टी और पत्थरों में सोना और जवाहरात दिखाई देंगे. इसके लिए तुम्हें दुनियावी नज़र पर पर्दा डालना होगा और दिल की निगाह से देखने की कोशिश करनी होगी. बाहरी दिखावे और बयानबाजी के परे देखो, तुम्हें हर तरफ हीरे-मोती ही दिखेंगे”.

Thursday, 2 May 2013

03.05.13


बड़ी मेहनत और लगन से पढ़ा था वो, जब उसके दोस्त और साथी मंहगे मंहगे टूशन पढ़ते थे, वो अपने पड़ोस के बच्चों को पढाया करता था, ताकि अपने स्कूल की फीस और किताबों का खर्च उठा सके..शायद ही वो सिनेमा देखने गया हो, और अच्छे कपडे ना होने की वजह से वो ज्यादा पार्टियों में भी नहीं जाता था..उसकी मुस्कराहट एक गंभीरता सी ओढ़े रहती थी, शायद उसकी उम्र कहती थी की हंस खेल ले, लेकिन परिवार की गरीबी दूर करने का बोझ उसे गंभीर बनाए रहता था.
खैर 78% के साथ उसने 12vi पास की और फर्स्ट एटेम्पट में Btech में एडमिशन भी हो गया.
फीस के लिए भारी भरकम बैंकलोन के तले भविष्य की खुशियों के लिए वर्तमान की खुशियों को नज़रंदाज़ करता हुआ, अपने दोस्तों को पढ़ता हुआ, मेहनत करता हुआ वो चला जा रहा था..आज उसके कॉलेज में प्लेसमेंट डे था..अच्छा एकेडमिक रिकॉर्ड रहा था उसका..सबको उम्मीद है की आज उसकी नौकरी लग जायेगी, पिताजी मन ही मन खुश हैं, और हर आहट के साथ दरवाजे की ओर देख रहे हैं, माँ ने आज उसके पसंद का हलवा बनाया है, उधर वो खड़ा है आंसुओं में, जिन्दगी के दोराहे पे, अपने मार्कशीट ओर सर्टिफिकेट लिए, बेरोजगार, बैंक के लोन तले, क्यूंकि इंटरव्यू लेने वाले ने बताया उसे इंजिनियर बनने के लिए इंजीनियरिंग तो आती थी, लेकिन नौकरी करने लायक अंग्रेजी नहीं..उसके चेहरे पे गंभीरता तो वही है, लेकिन फीकी सी ख़ुशी आज गायब है..शायद सपने टूटने से हौसले नहीं टूटा करते.


Wednesday, 1 May 2013

02.05.13


एक छोटा बच्चा एक बड़ी दूकान पर लगे टेलीफोनबूथ पर जाता हैं और मालिक से छुट्टे पैसे लेकर एक नंबर डायल करता हैं| दूकान का मालिक उस
लड़के को ध्यान से देखते हुए उसकी बातचीत पर ध्यान देता हैं लड़का- मैडम क्या आप मुझे अपने बगीचे की साफ़ सफाई का काम देंगी?

औरत- (दूसरी तरफ से) नहीं, मैंने एक दुसरे लड़के को अपने बगीचे का काम देखने के लिए रखलिया हैं|

लड़का- मैडम मैं आपके बगीचे का काम उस लड़के से आधे वेतन में करने को तैयार हूँ!

औरत- मगर जो लड़का मेरे बगीचे का काम कर रहा हैं उससे मैं पूरी तरह संतुष्ट हूँ|

लड़का- ( और ज्यादा विनती करते हुए) मैडम मैं आपके घर की सफाई भी फ्री में करदिया करूँगा!!

औरत- माफ़ करना मुझे फिर भी जरुरत नहीं हैं धन्यवाद|

लड़के के चेहरे पर एक मुस्कान उभरी और उसने फोन का रिसीवर रख दिया| दूकान का मालिक जो छोटे लड़के की बात बहुत ध्यान से सुन रहा था वह लड़के के पास आया और बोला- " बेटा मैं तुम्हारी लगन और व्यवहार से बहुत खुश हूँ, मैं तुम्हे अपने स्टोर में नौकरी दे सकता हूँ"

लड़का- नहीं सर मुझे जॉब की जरुरत नहीं हैं आपका धन्यवाद|

दुकानमालिक- (आश्चर्य से) अरे अभी तो तुमउस लेडी से जॉब के लिए इतनी विनती कर रहे थे !!

लड़का- नहीं सर, मैं अपना काम ठीक से कर रहा हूँ की नहीं बस मैं ये चेक कर रहा था, मैं जिससे बात कर रहा था, उन्ही के यहाँ पर जॉब करता हूँ|

*"This is called Self Appraisal" "आप अपना बेहतर दीजिये, फिर देखिये