Saturday, 14 December 2013
Friday, 13 December 2013
14-12-13
एक दिन किसी कारण से स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने पर एक दर्जी का बेटा अपने पापा की दुकान पर चला गया ।
वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा । उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं और कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं । फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सुई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं ।
जब उसने इसी क्रिया को चार-पाँच बार देखा तो उससे रहा नहीं गया और उसने अपने पापा से कहा कि वह उनसे एक बात पूछना चाहता है ।
पापा ने कहा - बेटा बोलो क्या पूछना चाहते हो ?
बेटा बोला - पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं । आप जब भी कपड़ा काटते हैं । उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते हैं और सुई से कपड़ा सीने के बाद उसे टोपी पर लगा लेते हैं । ऐसा क्यों ?
इसका जो उत्तर पापा ने दिया । उन दो पंक्तियाँ में मानों उसने ज़िन्दगी का सार समझा दिया ।
उत्तर था - ”बेटा, कैंची काटने का काम करती है और सुई जोड़ने का काम करती है । काटने वाले की जगह हमेशा नीची होती है परन्तु जोड़ने वाले की जगह हमेशा ऊपर होती है । यही कारण है कि मैं सुई को टोपी पर लगाता हूं और कैंची को पैर के नीचे
रखता हूं” ।
Thursday, 12 December 2013
13-12-13
यादों का नमक ,
सुबह आठ बजे मैं मैड्रिड पहुंच गया. यहां मुझे कुछ घंटे ही रुकना था इसलिए मैंने यह तय किया कि कुछ दोस्तों को फोन करके मुलाकात की जाए. फिर मैं अपनी जानी-पहचानी जगहों तक पैदल चलकर गया और अंत में रिटाइरो पार्क की एक बेंच पर सिगरेट पीने के लिए बैठ गया.
“तुम कहीं खोए हुए हो”, बेंच पर मेरे करीब बैठे एक बुज़ुर्गवार ने कहा.
“हम्म.. शायद”, मैंने कहा, “मुझे याद आ गया कि मैं 1986 में इसी बेंच पर मेरे दोस्त अनास्तासियो रांचाल के साथ बैठा हुआ था और हम दोनों मेरी पत्नी क्रिस्टीना को देख रहे थे जो थोड़ी ज्यादा पी लेने के बाद फ़्लेमेंको डांस करने की कोशिश कर रही थी”.
“अपनी स्मृतियों का आनंद लो”, बुज़ुर्गवार ने कहा, “लेकिन यह कभी मत भूलना कि स्मृतियां नमक की भांति होतीं हैं. खाने में नमक की सही-सही मात्रा ज़ायका लाती है लेकिन ज्यादा नमक उसे बिगाड़ देता है. यदि तुम अतीत की स्मृतियों में बहुत अधिक समय बिताने लगोगे तो तुम्हारा वर्तमान स्मृतियों से रिकत हो जाएगा”.
Wednesday, 11 December 2013
12-12-13
ट्रेन में रेलवे का कंबल करते हैं इस्तेमाल"..."तो हो जाइए सावधान" ?
ठण्ड के दिनों में यदि आप रेल की यात्रा कर रहे हैं,
तो जरा सावधान रहें, क्योंकि रेलवे का कंबल आपको बीमार बना सकता है..
बीएचयू चेस्ट विभाग के ओपीडी में रोज ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है,
जो सफर के दौरान रेल में मिलने वाले कंबल को इस्तेमाल करते हैं..
बोगी में मिलने वाले ज्यादातर कंबलों से माइट एलर्जी हो सकती है,
इसकी वजह से कभी-कभी दमा के अटैक भी पड़ जाते हैं,
दरअसल माइट एक जीवित कण होता है,
जो इंसान की त्वचा में पाया जाता है..
अक्सर रेल में सफर कर रहे लोग उस कंबल का इस्तेमाल कर लेते हैं,
जो पहले किसी ने ओढ़ा हो..
दरअसल माइट एक जीवित कण होता है,
जो इंसान की त्वचा में पाया जातेा है..
माइट के कण शरीर की मरी हुए सेलों को खाते हैं,
फिर शरीर से झड़ जाते हैं..
जब कई लोग लगातार सफर के दौरान एक ही कंबल का इस्तेमाल करते हैं,
तो शरीर से झड़ा हुआ माइट का कण कंबल के धूल के कणों के साथ मिल जाता है,
इससे अक्सर एलर्जी हो जाती है..
आप देखते या महसूस करते होंगे,
रेलवे के उन कंबलों को ओढ़ने से,
ज्यादा छिंक, खांसी, सांस लेने में समस्या आती है,
जिसका इस्तेमाल सार्वजनिक रूप से होता है..
क्या है इलाज....?
जब भी रेल में सफ़र करे तो कंबल को ध्यान से देख लें और हो सके तो,
कवर वाला कंबल ही इस्तेमाल करें..
मुंह पर प्लेन साफ कपड़ा रखकर सोए,
हो सके तो घर से लाये हुए कंबल का इस्तेमाल करें........
Tuesday, 10 December 2013
11-12-13
एक बार रेलवे-स्टेशन पर एक वृद्ध सज्जन बैठे रेल का इंतजार कर रहे थे. वहां संता जी आए और उन वृद्ध आदमी से पूछा.
संता - “अंकल, टाइम क्या हुआ है.”
वृद्ध सज्जन – “मुझे नहीं मालूम.”
संता – “लेकिन आपके हाथ में घडी तो है. प्लीज बता दीजिए न कितने बजे हैं ?”
वृद्ध सज्जन – “मैं नहीं बताऊंगा.”
संता – “पर क्यों ?”
वृद्ध सज्जन – “क्योंकि अगर मैं तुम्हे टाइम बता दूंगा तो तुम मुझे थैंक्यू बोलोगे और अपना नाम बताओगे. फिर तुम मेरा नाम, काम आदि पूछोगे. फिर संभव है हम लोग आपस में और भी बातचीत करने लगें. हम दोनों में जान-पहचान हो जायेगी तो हो सकता है कि ट्रेन आने पर तुम मेरी बगल वाली सीट पर ही बैठ जाओ. फिर हो सकता है कि तुम भी उसी स्टेशन पर उतरो जहां मुझे उतरना है. वहाँ मेरी बेटी, जोकि बहुत सुन्दर है, मुझे लेने स्टेशन आयेगी. तुम मेरे साथ ही होगे तो निश्चित ही उसे देखोगे. वह भी तुम्हे देखेगी. हो सकता है तुम दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठो और शादी करने की जिद करने लगो. इसलिए भाई, मुझे माफ करो …..! मैं ऐसा कंगाल दामाद नहीं चाहता जिसके पास टाइम देखने के लिए अपनी घडी तक नहीं है.हो हो हो..
संता - “अंकल, टाइम क्या हुआ है.”
वृद्ध सज्जन – “मुझे नहीं मालूम.”
संता – “लेकिन आपके हाथ में घडी तो है. प्लीज बता दीजिए न कितने बजे हैं ?”
वृद्ध सज्जन – “मैं नहीं बताऊंगा.”
संता – “पर क्यों ?”
वृद्ध सज्जन – “क्योंकि अगर मैं तुम्हे टाइम बता दूंगा तो तुम मुझे थैंक्यू बोलोगे और अपना नाम बताओगे. फिर तुम मेरा नाम, काम आदि पूछोगे. फिर संभव है हम लोग आपस में और भी बातचीत करने लगें. हम दोनों में जान-पहचान हो जायेगी तो हो सकता है कि ट्रेन आने पर तुम मेरी बगल वाली सीट पर ही बैठ जाओ. फिर हो सकता है कि तुम भी उसी स्टेशन पर उतरो जहां मुझे उतरना है. वहाँ मेरी बेटी, जोकि बहुत सुन्दर है, मुझे लेने स्टेशन आयेगी. तुम मेरे साथ ही होगे तो निश्चित ही उसे देखोगे. वह भी तुम्हे देखेगी. हो सकता है तुम दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठो और शादी करने की जिद करने लगो. इसलिए भाई, मुझे माफ करो …..! मैं ऐसा कंगाल दामाद नहीं चाहता जिसके पास टाइम देखने के लिए अपनी घडी तक नहीं है.हो हो हो..
Monday, 9 December 2013
10-12-13
एक भक्त था वह हनुमान जी को बहुत मनाता था,।
बड़े प्रेम और भाव से उनकी सेवा किया करता था. ।
एक दिन भगवान से कहने लगा–
मैँ आपकी इतनी भक्ति करता हूँ पर आज तक मुझे आपकी अनुभूति नहीं हुई।
मैं चाहता हूँ कि आप भले ही मुझे दर्शन ना दे पर ऐसा कुछ कीजिये की मुझे ये अनुभव हो की आप हो. भगवान ने कहा ठीक है।
तुम रोज सुबह समुद्र के किनारे सैर पर जाते हो,
जब तुम रेत पर चलोगे तो तुम्हे दो पैरो की जगह चार पैर दिखाई देँगे।
दो तुम्हारे पैर होगे और दो पैरो के निशान मेरे होगे.
इस तरह तुम्हे मेरी अनुभूति होगी.अगले दिन वह सैर पर गया,
जब वह रेत पर चलने लगा तो उसे अपने पैरों के साथ-साथ दो पैर और भी दिखाई दिये वह बड़ा खुश हुआ,
अब रोज ऐसा होने लगा.
एक बार उसे व्यापार में घाटा हुआ सब कुछ चला गया,
वह कंगाल हो गया उसके अपनो ने उसका साथ छोड दिया.
(देखो यही इस दुनिया की समस्या है, मुसीबत मे सब साथ छोड देते है).
अब वह सैर पर गया तो उसे चार पैरों की जगह दो पैर दिखाई दिये. उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि बुरे वक्त मेँ भगवान ने साथ छोड दिया.
धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होने लगा फिर सब लोग उसके पास वापस आने लगे.
एक दिन जब वह सैर पर गया तो उसने देखा कि चार पैर वापस दिखाई देने लगे.
उससे अब रहा नही गया, वह बोला- भगवान जब मेरा बुरा वक्त था तो
सब ने मेरा साथ छोड़ दिया था पर मुझे इस बात का गम नहीं था क्योकि इस दुनिया में ऐसा ही होता है, पर आप ने भी उस समय मेरा साथ छोड़ दिया था,
ऐसा क्यों किया?
तो भगवान ने कहा – तुमने ये कैसे सोच लिया की मैँ तुम्हारा साथ छोड़ दूँगा, तुम्हारे बुरे वक्त में जो रेत पर तुमने दो पैरोँ के निशान देखे वे तुम्हारे पैरों के नहीं मेरे पैरों के थे। उस समय मैँ तुम्हे अपनी गोद में उठाकर चलता था और आज जब तुम्हारा बुरा वक्त खत्म हो गया तो मैंने तुम्हे नीचे उतार दिया है।
इसलिए तुम्हे फिर से चार पैर दिखाई दे रहे हैं।
Sunday, 8 December 2013
09-12-13
5 Ways to Keep a Relationship Working... .
1. Love each other
2. Don’t lie
3. Keep communication open
4. Stay sweet
5. When you get hurt, focus on forgiving
6. Never talk about break-ups
7. Never say ‘it’s ok’ when it’s not
8. Learn to put your ego aside
9. If you say ‘sorry,' mean it
10. Don’t compare yourpast with your present
11. Don’t talk about your ex’s
12. Practice 'give and take'
13. Be aware of your partner’s feelings
14. After a fight, work on resolving the issue right away; don’t let the days go by
15. Although there is no perfect person’ out there, There is a ‘right one for u.
Subscribe to:
Posts (Atom)






