Thursday, 12 December 2013

13-12-13


यादों का नमक ,

सुबह आठ बजे मैं मैड्रिड पहुंच गया. यहां मुझे कुछ घंटे ही रुकना था इसलिए मैंने यह तय किया कि कुछ दोस्तों को फोन करके मुलाकात की जाए. फिर मैं अपनी जानी-पहचानी जगहों तक पैदल चलकर गया और अंत में रिटाइरो पार्क की एक बेंच पर सिगरेट पीने के लिए बैठ गया.
“तुम कहीं खोए हुए हो”, बेंच पर मेरे करीब बैठे एक बुज़ुर्गवार ने कहा.
“हम्म.. शायद”, मैंने कहा, “मुझे याद आ गया कि मैं 1986 में इसी बेंच पर मेरे दोस्त अनास्तासियो रांचाल के साथ बैठा हुआ था और हम दोनों मेरी पत्नी क्रिस्टीना को देख रहे थे जो थोड़ी ज्यादा पी लेने के बाद फ़्लेमेंको डांस करने की कोशिश कर रही थी”.
“अपनी स्मृतियों का आनंद लो”, बुज़ुर्गवार ने कहा, “लेकिन यह कभी मत भूलना कि स्मृतियां नमक की भांति होतीं हैं. खाने में नमक की सही-सही मात्रा ज़ायका लाती है लेकिन ज्यादा नमक उसे बिगाड़ देता है. यदि तुम अतीत की स्मृतियों में बहुत अधिक समय बिताने लगोगे तो तुम्हारा वर्तमान स्मृतियों से रिकत हो जाएगा”.

Wednesday, 11 December 2013

12-12-13


ट्रेन में रेलवे का कंबल करते हैं इस्तेमाल"..."तो हो जाइए सावधान" ?

ठण्ड के दिनों में यदि आप रेल की यात्रा कर रहे हैं,
तो जरा सावधान रहें, क्योंकि रेलवे का कंबल आपको बीमार बना सकता है..

बीएचयू चेस्ट विभाग के ओपीडी में रोज ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है,
जो सफर के दौरान रेल में मिलने वाले कंबल को इस्तेमाल करते हैं..

बोगी में मिलने वाले ज्यादातर कंबलों से माइट एलर्जी हो सकती है,
इसकी वजह से कभी-कभी दमा के अटैक भी पड़ जाते हैं,
दरअसल माइट एक जीवित कण होता है,
जो इंसान की त्वचा में पाया जाता है..

अक्सर रेल में सफर कर रहे लोग उस कंबल का इस्तेमाल कर लेते हैं,
जो पहले किसी ने ओढ़ा हो..

दरअसल माइट एक जीवित कण होता है,
जो इंसान की त्वचा में पाया जातेा है..

माइट के कण शरीर की मरी हुए सेलों को खाते हैं,
फिर शरीर से झड़ जाते हैं..

जब कई लोग लगातार सफर के दौरान एक ही कंबल का इस्तेमाल करते हैं,
तो शरीर से झड़ा हुआ माइट का कण कंबल के धूल के कणों के साथ मिल जाता है,
इससे अक्सर एलर्जी हो जाती है..

आप देखते या महसूस करते होंगे,
रेलवे के उन कंबलों को ओढ़ने से,
ज्यादा छिंक, खांसी, सांस लेने में समस्या आती है,
जिसका इस्तेमाल सार्वजनिक रूप से होता है..

क्या है इलाज....?
जब भी रेल में सफ़र करे तो कंबल को ध्यान से देख लें और हो सके तो,
कवर वाला कंबल ही इस्तेमाल करें..

मुंह पर प्लेन साफ कपड़ा रखकर सोए,
हो सके तो घर से लाये हुए कंबल का इस्तेमाल करें........

Tuesday, 10 December 2013

11-12-13


एक बार रेलवे-स्टेशन पर एक वृद्ध सज्जन बैठे रेल का इंतजार कर रहे थे. वहां संता जी आए और उन वृद्ध आदमी से पूछा.
संता - “अंकल, टाइम क्या हुआ है.”
वृद्ध सज्जन – “मुझे नहीं मालूम.”
संता – “लेकिन आपके हाथ में घडी तो है. प्लीज बता दीजिए न कितने बजे हैं ?”
वृद्ध सज्जन – “मैं नहीं बताऊंगा.”
संता – “पर क्यों ?”
वृद्ध सज्जन – “क्योंकि अगर मैं तुम्हे टाइम बता दूंगा तो तुम मुझे थैंक्यू बोलोगे और अपना नाम बताओगे. फिर तुम मेरा नाम, काम आदि पूछोगे. फिर संभव है हम लोग आपस में और भी बातचीत करने लगें. हम दोनों में जान-पहचान हो जायेगी तो हो सकता है कि ट्रेन आने पर तुम मेरी बगल वाली सीट पर ही बैठ जाओ. फिर हो सकता है कि तुम भी उसी स्टेशन पर उतरो जहां मुझे उतरना है. वहाँ मेरी बेटी, जोकि बहुत सुन्दर है, मुझे लेने स्टेशन आयेगी. तुम मेरे साथ ही होगे तो निश्चित ही उसे देखोगे. वह भी तुम्हे देखेगी. हो सकता है तुम दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठो और शादी करने की जिद करने लगो. इसलिए भाई, मुझे माफ करो …..! मैं ऐसा कंगाल दामाद नहीं चाहता जिसके पास टाइम देखने के लिए अपनी घडी तक नहीं है.हो हो हो..

Monday, 9 December 2013

10-12-13


एक भक्त था वह हनुमान जी को बहुत मनाता था,।
बड़े प्रेम और भाव से उनकी सेवा किया करता था. ।

एक दिन भगवान से कहने लगा–
मैँ आपकी इतनी भक्ति करता हूँ पर आज तक मुझे आपकी अनुभूति नहीं हुई।
मैं चाहता हूँ कि आप भले ही मुझे दर्शन ना दे पर ऐसा कुछ कीजिये की मुझे ये अनुभव हो की आप हो. भगवान ने कहा ठीक है।
तुम रोज सुबह समुद्र के किनारे सैर पर जाते हो,
जब तुम रेत पर चलोगे तो तुम्हे दो पैरो की जगह चार पैर दिखाई देँगे।
दो तुम्हारे पैर होगे और दो पैरो के निशान मेरे होगे.
इस तरह तुम्हे मेरी अनुभूति होगी.अगले दिन वह सैर पर गया,
जब वह रेत पर चलने लगा तो उसे अपने पैरों के साथ-साथ दो पैर और भी दिखाई दिये वह बड़ा खुश हुआ,
अब रोज ऐसा होने लगा.
एक बार उसे व्यापार में घाटा हुआ सब कुछ चला गया,
वह कंगाल हो गया उसके अपनो ने उसका साथ छोड दिया.
(देखो यही इस दुनिया की समस्या है, मुसीबत मे सब साथ छोड देते है).

अब वह सैर पर गया तो उसे चार पैरों की जगह दो पैर दिखाई दिये. उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि बुरे वक्त मेँ भगवान ने साथ छोड दिया.
धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होने लगा फिर सब लोग उसके पास वापस आने लगे.
एक दिन जब वह सैर पर गया तो उसने देखा कि चार पैर वापस दिखाई देने लगे.
उससे अब रहा नही गया, वह बोला- भगवान जब मेरा बुरा वक्त था तो
सब ने मेरा साथ छोड़ दिया था पर मुझे इस बात का गम नहीं था क्योकि इस दुनिया में ऐसा ही होता है, पर आप ने भी उस समय मेरा साथ छोड़ दिया था,

ऐसा क्यों किया?

तो भगवान ने कहा – तुमने ये कैसे सोच लिया की मैँ तुम्हारा साथ छोड़ दूँगा, तुम्हारे बुरे वक्त में जो रेत पर तुमने दो पैरोँ के निशान देखे वे तुम्हारे पैरों के नहीं मेरे पैरों के थे। उस समय मैँ तुम्हे अपनी गोद में उठाकर चलता था और आज जब तुम्हारा बुरा वक्त खत्म हो गया तो मैंने तुम्हे नीचे उतार दिया है।
इसलिए तुम्हे फिर से चार पैर दिखाई दे रहे हैं।


Sunday, 8 December 2013

09-12-13


5 Ways to Keep a Relationship Working... .

1. Love each other
2. Don’t lie
3. Keep communication open
4. Stay sweet
5. When you get hurt, focus on forgiving
6. Never talk about break-ups
7. Never say ‘it’s ok’ when it’s not
8. Learn to put your ego aside
9. If you say ‘sorry,' mean it
10. Don’t compare yourpast with your present
11. Don’t talk about your ex’s
12. Practice 'give and take'
13. Be aware of your partner’s feelings
14. After a fight, work on resolving the issue right away; don’t let the days go by
15. Although there is no perfect person’ out there, There is a ‘right one for u.

Saturday, 7 December 2013

08-12-13


कमरे का रहस्य
एक अस्पताल में ICU वार्ड के एक पलंग पर मरीज हमेशा ही मर जाता था, बहुत ही रहस्यपूर्ण बात थी की मरीज की कैसी भी हलात हो, कितनी भी सावधानी रखी जाये पर उसी पलंग पर प्रति रविवार
सुबह ११.०० बजे ही मौत होती थी .
पूरा अस्पताल प्रशासन परेशान, कैसी विडम्बना है, कोई रास्ता तो सोचना होगा, ये देवीक आपदा है या कोई रहस्य,किसी बुरी आत्मा का साया है या भूत प्रेत का चक्कर ..कुछ समझ नहीं आ रहा . मेडिकल साइंस मानने को तैयार भी नहीं पर सच भी लगता है ..
कोई भी इस रहस्य को नहीं सुलझा पाया की रविवार को ११ बजे ही मौत क्यूँ होती है?
अगले रविवार ११ बजे से कुछ पहले ही अस्पताल के सभी डॉक्टर्स, नर्स,अन्य स्टाफ और मीडिया उस वार्ड के बाहर बहुत ही बैचेनी, उत्सुकता, खौफ के साथ प्रतीक्षा कर रहे है कि देखेँ आखिर क्या होता है,
किसी के हाथ मे लकड़ी का क्रॉस (सलीब) है तो कोई धार्मिक पुस्तक लिए हुए है, कोई माला ले कर फेर रहा है ..कोई पवित्र जल लिए हुए है .. की वो बुरी आत्मा के साए से बच सके ..
जैसे ही ११ बजते है , उस वार्ड मे साप्ताहिक सफाई कर्मी प्रवेश करता है अन्दर घुसते ही वो उस पलंग के पास जाकर जीवन रक्षक उपकरण बंद करता है और उस बिलजी के प्लग मे वेक्यूम
क्लीनर का प्लग लगा देता है ..
सभी आश्चर्य चकित हो कर देखते रह जाते है ..बहुत ही गहरा रहस्य बेपर्दा हो जाता है ...

Friday, 6 December 2013

07-12-13


लोहे की दुकान में अपने पिता के साथ काम कर रहे एक बालक ने अचानक ही अपने पिता से पुछा – “पिताजी इस दुनिया में मनुष्य की क्या कीमत होती है ?”

पिताजी एक छोटे से बच्चे से ऐसा गंभीर सवाल सुन कर हैरान रह गये.

फिर वे बोले “बेटे एक मनुष्य की कीमत आंकना बहुत मुश्किल है, वो तो अनमोल है.”

बालक – क्या सभी कीमती और महत्त्वपूर्ण हैं ?

पिताजी – हाँ बेटे.

बालक कुछ समझा नही उसने फिर सवाल किया – तो फिर इस दुनिया मे कोई गरीब तो कोई अमीर क्यो है? किसी की कम रिस्पेक्ट तो किसी की ज्यादा क्यो होती है?

सवाल सुनकर पिताजी कुछ देर तक शांत रहे और फिर बालक से स्टोर रूम में पड़ा एक लोहे का रॉड लाने को कहा.

रॉड लाते ही पिताजी ने पुछा – इसकी क्या कीमत होगी?

बालक – 200 रूपये.

पिताजी – अगर मै इसके बहुत से छोटे-छटे कील बना दू तो इसकी क्या कीमत हो जायेगी ?

बालक कुछ देर सोच कर बोला – तब तो ये और महंगा बिकेगा लगभग 1000 रूपये का .

पिताजी – अगर मै इस लोहे से घड़ी के बहुत सारे स्प्रिंग बना दूँ तो?

बालक कुछ देर गणना करता रहा और फिर एकदम से उत्साहित होकर बोला ” तब तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा हो जायेगी.”

फिर पिताजी उसे समझाते हुए बोले – “ठीक इसी तरह मनुष्य की कीमत इसमे नही है की अभी वो क्या है, बल्की इसमे है कि वो अपने आप को क्या बना सकता है.”

बालक अपने पिता की बात समझ चुका था .

Friends अक्सर हम अपनी सही कीमत आंकने मे गलती कर देते है. हम अपनी present status को देख कर अपने आप को valueless समझने लगते है. लेकिन हममें हमेशा अथाह शक्ति होती है. हमारा जीवन हमेशा सम्भावनाओ से भरा होता है. हमारी जीवन मे कई बार स्थितियाँ अच्छी नही होती है पर इससे हमारी Value कम नही होती है. मनुष्य के रूप में हमारा जन्म इस दुनिया मे हुआ है इसका मतलब है हम बहुत special और important हैं . हमें हमेशा अपने आप को improve करते रहना चाहिये और अपनी सही कीमत प्राप्त करने की दिशा में बढ़ते रहना चाहिये..